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इस सप्ताह के लिए पिता के ह्रदय से    (06/05/2018)

परमेश्वर का प्रेेम हम  में  सिद्ध हुआ

पिता यीशु से भरपूर और पूर्ण रूप से प्यार करते हैं, यह एक सिद्ध प्रेम है।  वे बेरोकटोक, अपने पूरे  मन से यीशु से प्रेम करते हैं।  हम जो परमेश्वर  से कुछ भी अच्छा पाने के योग्य नहीं हैं  यीशु के कारण परमेश्वर द्वारा ग्रहण किए जाते हैं। और पिता हम से उतना ही प्यार करते हैं जितना वे यीशु से करते हैं,  बिलकुल उसी प्रकार से और उसी परिमाण में - भरपूर  और पूर्ण रूप से।  जब प्यार की बात आती है तो पिता हम में और यीशु में कोई फर्क नहीं करते।  कभी कभी तो ऐसा भी लगता है कि हमें अधिक प्यार दिया गया है क्योंकि पिता ने हमें अपनाने के ख़ातिर यीशु को कुर्बान कर दिया।  देखो पिता ने  हमसे कैसा प्रेम किया कि हम उसकी सन्तान कहलाएं! और फिर कल्पना करना कि पुत्र यीशु भी हम से उतना ही प्यार करते हैं और उसी प्रकार से पवित्र आत्मा भी, ओह कितना अद्भुत प्यार है! 

    अब हमें भी इसी प्रकार से एक दूसरे से  प्रेम करने की आज्ञा मिली है । क्या हम वैसा प्यार करते हैं? क्या हम स्वयं के परिवार के लोगों (माता, पिता, पति, पत्नी और भाई बहनों ), रिश्तेदारों,  मित्रों और पड़ोसियों से वैसा प्यार करते हैं जैसे पिता हम से करते हैं? क्या हम उसी प्रकार के प्रेम को अपने में से होकर अपने आस पास के लोगों में प्रवाहित होने देते हैं?  जब  हम ऐसा होने देते हैं  तब हम परमेश्वर के निवास स्थान बन जाते हैं क्योंकि जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है और परमेश्वर उसमें।  बहुतों के पास आशीषें हैं और बहुतों के पास वरदान  हैं परन्तु केवल इस प्रकार का प्यार ही वह कारण होगा जिससे न्याय के दिन हमें  हियाव होगा क्योंकि जैसा वह है  वैसे ही हम भी इस संसार में हैं। यह हम में परमेश्वर के प्रेम की परिपूर्णता और हम में से होकर दूसरों तक उस प्रेम का प्रवाह है जो हमें यीशु के समान बनाता है।

   जब आप इस प्रकार के प्रेम में चलेंगे तब वे सारी कमियां/कमजो़रियां और रुकावटें  जो जीवन में आपकी प्रगति में विलंब लाती हैं, परमेश्वर के प्रेम की सामर्थ के द्वारा झाड़कर वैसे ही अलग कर दी जाएगी, जैसे नदी का पानी अपने रास्ते में आनेवाले समस्त कूड़े - कचरे को  बहा ले जाता है। नदी बहते - बहते अन्त में समुद्र में जा मिलती है। वह समुद्र के पानी मे मिल जाती है और उसमें समाकर उस के साथ एक हो जाती है। ठीक उसी प्रकार जब आप परमेश्वर के इस प्रेम को अपने में से  होकर  बहने देते हैं तो न केवल आप उस से  शुद्ध होंगे पर एक दिन आप भी बहकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर में समा जाएंगे और हमेशा हमेशा के लिए उनके साथ एक हो जाएंगे।  होने दे,कि परमेश्वर हमारे ह्रदयों को अपने समान प्रेम वाले प्रेम में स्थिर कर दें। परमेश्वर के प्रेम को अपने जीवन में और अपने द्वारा दूसरों तक  प्रार्थना द्वारा प्रवाहित होने देने के द्वारा हमें इस प्रकार के प्रेम में प्रवेश मिलता है।

परमेश्वर आपको आशीष दें।

एस. आर. मनोहर

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